Mohabbatein Movie Script In Hindi Direct

वह रोते हुए कहते हैं: "आज मैं हार गया... और पहली बार लग रहा है, जीत भी गया।" स्थान: गुरुकुल का खुला मैदान – वसंत ऋतु, फूल खिले हैं।

"नहीं, प्रेम सिखाने।" mohabbatein movie script in hindi

नारायण शंकर तीनों युगलों को सार्वजनिक अपमानित करते हैं: "तुम सब गुरुकुल की मान्यताओं पर थूक रहे हो। कल सुबह तक, तुममें से हर एक को अपने प्यार को त्यागना होगा, या फिर इस संस्थान को त्यागना होगा।" छात्र डर से काँपते हैं। राज आगे बढ़ते हैं। फूल खिले हैं। "नहीं

"आप सही कहते हैं, गुरुजी। प्यार दर्द देता है। पर यही दर्द हमें इंसान बनाता है। आपने अपनी मरहम लगा दी – अनुशासन। हमने चुना – प्यार।" दृश्य 5: क्लाइमेक्स – टूटता अहंकार राज अपनी कहानी सुनाते हैं: "मैंने भी प्यार किया था। उसकी याद में आज भी मैं बजाता हूँ, रोता हूँ, जीता हूँ। प्यार मरता नहीं, गुरुजी। वह बस बदल जाता है – कभी याद बनकर, कभी आवाज़ बनकर, कभी एक टूटे हुए शिक्षक बनकर।" कभी आवाज़ बनकर

नारायण शंकर की आँखों में पहली बार नमी। वह अपनी मृत पत्नी की तस्वीर देखते हैं और याद करते हैं: "मैंने भी प्यार किया था... और उसी प्यार ने मुझे यह सिखाया कि अगर वह चली गई, तो प्यार ही कारण था।"